बाल ठाकरे के निधन के बाद फेसबुक टिप्पणी की वजह से
इन दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था 

मुंबई के पालघर की दो बहादुर कन्याओं Shaheen Dhada और Rinu Shrinivasan ने वो कर दिखाया जो, न होता तो, बाल ठाकरे का असल चरित्र उनके मरने के साथ दफन हो जाता। दरअसल यही सारे जीवन बाल ठाकरे रहे। विवादित, दबंग, अपने खिलाफ खड़े लोगों को मुंहतोड़ जवाब देने वाले और मृत्यु के बाद कम से कम हिंदू संस्कार में तो, किसी को बुरा कहने का रिवाज नहीं है। सो, मीडिया ने भी नहीं कहा। इसमें गलत भी क्या था। अब जब Shaheen Dhada और Rinu Shrinivasan की फेसबुक पोस्ट के बाद शिवसैनिक मूल चरित्र में आए तो, मीडिया फिर फॉर्म में आ गया। कतार में लगे अनुशासित, आंसू बहाते शिवसैनिकों को भी अगर कोई मीडिया से गालूी खिलाना चाहता था तो, अच्छा हुआ वो, मंशा पूरी न हुई। मीडिया जाने-अनजाने खुद ही परिपक्व हो रहा है। दुखी होने वाले दुखी होते रहें।


1 Comment

Neetu Singhal · December 1, 2012 at 10:29 am

प्रश्न : — ये कौन सी प्रथा है..??

उत्तर : — प्रदुषण की मारी हुई 'घुंघट प्रथा'…..

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