उत्तर
प्रदेश में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ
ने 19 मार्च
को शपथ ली। उग्र हिन्दुत्व की छवि के नेता होने की वजह से योगी आदित्यनाथ को लेकर ढेरों
आशंका लोगों के मन में थी। उसमें सबसे बड़ी आशंका गोरखपुर के सांसद और गोरक्षपीठ
के महंत आदित्यनाथ की सरपरस्ती में चल रहे संगठन हिन्दू युवा वाहिनी की गतिविधियों
को लेकर थी। हिन्दू युवा वाहिनी के संरक्षक योगी आदित्यनाथ हैं। और ये वही हिन्दू
युवा वाहिनी है, जिसके
कार्यक्रमों में विवादित भाषणों की वजह से योगी आदित्यनाथ को उग्र हिन्दू नेता के
तौर पर देखा जाता रहा है। अब योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके
हैं। लेकिन, योगी
आदित्यनाथ अभी भी हिन्दू युवा वाहिनी के संरक्षक हैं। अब अगर संगठन का संरक्षक
प्रदेश का मुख्यमंत्री बन जाए तो, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ना स्वाभाविक है। इसी बढ़े मनोबल की वजह से
हिन्दू युवा वाहिनी के कई कार्यकर्ताओं के गलत व्यवहार चर्चा में आ गए। आदित्यनाथ
के मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश में कई जगहों पर होर्डिंग में वही नारे लिखे गए जो, गोरखपुर सांसद के
तौर पर आदित्यनाथ के लिए लगाए जाते थे। प्रदेश में कई जगहों पर – यूपी में रहना है
तो योगी, योगी
कहना है- लिखी हुई होर्डिंग लगाई गई। 12 अप्रैल को मेरठ से एक खबर आई कि हिन्दू युवा वाहिनी  के
कार्यकर्ताओं ने एक घर में घुसकर एक दंपति के साथ बदसलूकी की। और उन्हें थाने ले
जाकर पुलिस कार्रवाई का दबाव बनाया। बताया जा रहा है कि लड़का मुस्लिम और लड़की हिन्दू है।
हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं का ये आरोप है कि लड़के ने अपनी धार्मिक पहचान
छिपाकर लड़की को बरगलाया और धर्म परिवर्तन की कोशिश कर रहा था। लड़की के
परिवारवालों ने उनसे बचाने की गुहार लगाई। इसी तरह नोएडा से एक खबर आई कि हिन्दू
युवा वाहिनी के एक पदाधिकारी ने एसयूवी से बाइक सवार को टक्कर मार दी और उसके बाद
बाइक पर एसयूवी चढ़ाते हुए भाग निकला। ऐसी छिटपुट घटनाएं कई हुईं, जिसमें हिन्दू युवा
वाहिनी का पदाधिकारी, कार्यकर्ता बताकर गलत व्यवहार किया गया। कानून व्यवस्था के लिहाज से
सबसे बड़ी मुश्किल खुद हिन्दू युवा वाहिनी ही खड़ी करती दिखी। 
हिन्दू
युवा वाहिनी वही संगठन है, जिसके बैनर तले योगी आदित्यनाथ ने 2012 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में
विधानसभा प्रत्याशी उतारे थे। ये प्रत्याशी भाजपा के खिलाफ लड़े। इस चुनाव में भी कुछ लोगों ने
हिन्दू युवा वाहिनी के बैनर पर चुनाव लड़ा,
जिसे आदित्यनाथ की टिकट बंटवारे में अपनी भूमिका
मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा गया था। हालांकि, अब  ये सब
पुरानी बात हो चली है। अब योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के नेता के तौर पर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इसलिए इस सवाल का जबाव स्पष्ट होना
जरूरी हो गया है कि प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने में प्रदेश के
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आदेश सबसे ऊपर होगा या फिर हिन्दू युवा वाहिनी के
संरक्षक गोरक्षनाथ पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ,
हिन्दू युवा वाहिनी के जरिए कानून व्यवस्था का
राज कायम करेंगे। जब योगी विपक्ष में थे और उन्हें लगता था कि हिन्दू हितों को
दरकिनार किया जा रहा है, तब हिन्दू युवा वाहिनी के जरिए हिन्दुओं के हित की बात उठाने की बात
तो समझ में आती है। लेकिन, अब जब प्रदेश के मुखिया खुद योगी आदित्यनाथ हैं, तो ये बात पच नहीं
रही है। क्या हिन्दू
युवा वाहिनी के लोग कानून से ऊपर हैं। 
अच्छी
बात है कि इस बात को योगी आदित्यनाथ शायद समझ चुके हैं। इसीलिए हिन्दू युवा वाहिनी
ने नए सदस्यों की भर्ती पर रोक लगा दी है। हिन्दू युवा वाहिनी का सदस्य बनकर रौब
गांठने का ऐसा असर है कि योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से हर रोज 5000 नए लोग हिन्दू युवा
वाहिनी से जुड़ने के लिए अर्जियां दे रहे हैं। हिन्दू युवा वाहिनी की वेबसाइट पर
अभी साफ-साफ लिखा हुआ है कि संगठन की सदस्यता अनिश्चितकालीन स्थगित है। वेबसाइट पर
दिया गया सदस्यता फॉर्म सिर्फ आवेदन तक ही सीमित है। हिन्दू युवा वाहिनी ने मेरठ
और नोएडा की घटनाओं पर भी स्पष्ट किया कि इन घटनाओं में शामिल लोग हिन्दू युवा
वाहिनी के वर्तमान सदस्य नहीं हैं। हिन्दू युवा वाहिनी की राज्य इकाई बदल दी गई
है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक,
योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी के
पदाधिकारियों के साथ बैठक की है। इस बैठक में योगी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि
हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्य किसी के साथ दुर्व्यवहार न करें और किसी मामले में
गलत होने की सूचना स्थानीय पुलिस-प्रशासन को दें। खुद कोई भी कार्रवाई न करें। देश
के किसी भी राज्य में पहली बार है कि जब कोई संन्यासी मुख्यमंत्री बना है। इसलिए
योगी पर इस बात का बहुत ज्यादा दबाव है कि वो खुद के साथ जुड़ी आशंकाओं को खत्म
करें। योगी ने अपन कार्यकाल की शुरुआत में ही जिस तरह का एजेंडा पेश किया है, वो अच्छी सरकार की
सम्भावनाएं बनाता है। लेकिन, हिन्दू युवा वाहिनी की एक भी गलत हरकत योगी के मुख्यमंत्री रहते सभी
अच्छे कामों को धूमिल कर देगी, ये तय है। अच्छी बात ये है कि योगी खुद इस बात को समझ रहे हैं और
हिन्दू युवा वाहिनी पर लगाम लगा रहे हैं। क्योंकि, लोकतंत्र में सम्वैधानिक तरीके से मुख्यमंत्री की
कुर्सी पर बैठे योगी आदित्यनाथ से बड़ा किसी हिन्दू युवा वाहिनी का संरक्षक नहीं हो सकता। 

Related Posts

राजनीति

बुद्धिजीवी कौन है?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के बुद्धिजीवियों को भाजपा विरोधी बताने के बाद ये सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या बुद्धिजीवी एक खास विचार के ही हैं। मेरी नजर में बुद्धिजीवी की बड़ी सीधी Read more…

राजनीति

स्वतंत्र पत्रकारों के लिए जगह कहां बची है?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुद्धिजीवियों पर ये आरोप लगाकर नई बहस छेड़ दी है कि बुद्धिजीवी बीजेपी के खिलाफ हैं। मेरा मानना है कि दरअसल लम्बे समय से पत्रकार और बुद्धिजीवी होने के खांचे Read more…

अखबार में

हत्या में सम्मान की राजनीति की उस्ताद कांग्रेस

गौरी लंकेश को कर्नाटक सरकार ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ अन्तिम विदाई दी। गौरी लंकेश को राजकीय सम्मान दिया गया और सलामी दी गई। इस तरह की विदाई आमतौर पर शहीद को दी जाती Read more…