राजनीति

वीकेंड मां-बाप, वीकेंड पति-पत्नी और वीकेंड बच्चे

मां-बाप के साथ शनिवार-रविवार की छुट्टियों में खिलौनों, कपड़ों से लदे बच्चों को देखकर लगता है कि इस जमाने के बच्चे कितने सुखी हैं। अमीर मां-बाप हैं, तरह-तरह के कपड़े, जूते, फैशन की हर चीज जो, टीवी पर दिखती है, इन बच्चों के पास है। चॉकलेट, आइसक्रीम, पॉपकॉर्न, इंटरनेशनल टॉयज Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

मतिभ्रम से उबर नहीं पा रहे हैं राहुल गांधी

ऱाहुल गांधी भ्रमित भर हैं। या वो, ताउम्र ऐसी ही बचकानी राजनीतिक बयानबाजी के सहारे जीवन चलाते रहेंगे। राजीव गांधी का अक्स राहुल में देखने वालों को राहुल लगातार निराश कर रहे हैं। लोकसभा चुनावों की तैयारी में पिछले करीब साल भर से जुटी कांग्रेस ने अब चुनावी तैयारी पर Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

का भई चाचा …. बोल भतीजा

अब फिर से बारी बूढ़े शेर बाल ठाकरे की थी। नया नवेला मराठी शेर ‘राज’ करने के लिए बूढ़े शेर की मांद में उसके हिस्से का शिकार निपटाने की तैयारी कर रहा था। शिकार है मराठी वोटबैंक और हथियार है मराठियों की अस्मिता। महाराष्ट्र में राज करने का ये हथियार Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

किसानों की चिंता करने वाले पत्रकार का सम्मान

गांव, किसान और कर्ज की समस्या। ये बाते मीडिया में बमुश्किल ही जगह पाती हैं। ऐसे में किसी अखबार के संपादक का खुद इस तरह की रिपोर्टिंग करना और अपने रिपोर्टर्स को इस तरह की खबरें करने के लिए प्रेरित करना पत्रकारीय मानदंडों को बचाने में मदद करता है। बुंदेलखंड Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

देश में लोकतंत्र की सबसे मजबूत पाठशाला है इलाहाबाद विश्वविद्यालय

( इलाहाबाद विश्वविद्यालय का पहला अंतराष्ट्रीय पुरातन छात्र सम्मेलन 16-17-18 फरवरी को हुआ। किसी वजह से इसमें मैं जा नहीं पाया। इस पुरातन छात्र सम्मेलन की पत्रिका के लिए मुझसे भी विश्वविद्यालय में मेरे विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दिनों के बारे में लेख मांगा गया था। जो, विश्वविद्यालय की पत्रिका Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

पत्थर में जान डाल देते हैं ज्ञान भाई

पत्थरों में जिंदगी का अनुभव कितने लोगों ने किया होगा। लेकिन, ज्ञान सिंह के लिए ये बेहद सहज कार्य है। इतना सहज कि वो उनकी जिंदगी का अंग बन गया है। और, अब तो पत्थर ही ज्ञान सिंह की पहचान बन गए हैं। पत्थरों का मोह ही उन्हें इलाहाबाद से Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

ये राज ठाकरे और उनके समर्थकों के पढ़ने के लिए है

राज ठाकरे की ठकुरैती इस समय शांत हो गई है। लेकिन, मराठी अस्मिता के नाम पर कब वो जाग जाए ये कोई नहीं जानता। मैं दैनिक जागरण अखबार में इलाहाबाद का पन्ना पढ़ रहा था। मैं खुद भी इलाहाबाद का हूं और मेरे मोहल्ले दारागंज के ही मराठियों से जुड़ी Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

चीन में भी शहरों और गांवों के विकास में बड़ा फर्क है

भारत के लिए अक्सर ये कहा जाता है कि तरक्की के साथ सामाजिक विकास के मामले में भी चीन से सीखा जा सकता है। ये भी दावा किया जाता है कि वहां के कम्युनिस्ट शासन में सभी लोगों में बराबर बंटवारा है। अभी कुछ दिन पहले जब खबर आई थी Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

ई लल्लूपना न होये ऊ, सच्चाई है जउने प आंख मूंदे कइउ पीढ़ी बरबाद होई ग बा

मैंने उत्तर प्रदेश के बारे में ASSOCHAM की एक रिपोर्ट के आधार पर तरक्की की उम्मीद जताई थी। उस पोस्ट के आधार पर एक ब्लॉगर लल्लू ने बहुत गंभीर बातें कह डाली हैं। इस पोस्ट को लल्लूपना टैग दिया गया है लेकिन, ये बात गंभीरता से न लेने से ही Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

अगले 3 सालों में उत्तर प्रदेश में 25 लाख नौकरियां

देश के बीमारू राज्यों में अगुवा उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए इससे अच्छी खबर नहीं हो सकती है। ASSOCHAM को अब उत्तर प्रदेश में संभावनाएं दिख रही हैं। देश के दो सबसे बड़े उद्योग संगठनों में से एक ASSOCHAM की ताजा स्टडी रिपोर्ट कह रही है कि उत्तर प्रदेश Read more…

By Harsh, ago