हिन्दुस्तान समझने के लिए सबसे बेहतर जरिया हिन्दुस्तान में रहना, आते-जाते रहना है। क्योंकि, हिन्दुस्तान विशाल है, इसलिए सिर्फ अपने आसपास को देख समझकर ही, समझ पूरी नहीं हो पाती है। इसका अहसास फिर से हुआ, जब मैं रण उत्सव में शामिल होने के लिए टेन्टसिटी में रहा। यहां बांधेज कलाकार सरफराज अयूब खत्री (सुमैया बांधेज) से मुलाकात हुई। सरफराज अयूब खत्री, नाम से समझ ही नहीं आया कि, हिन्दू या मुसलमान। इसीलिए ऐसे ही मैंने सरफराज से पूछ भी लिया। उसने जवाब दिया कि, हम सब पहले तो हिन्दू ही थे। सरफराज भुज के पास रहते हैं। सीखकर बांधेज का काम शुरू किया और, अब अच्छा काम चल रहा है। सरफराज बहुत धीमे बोलते हैं, मिठास की ढेर सारी वजहों में से एक वजह यह भी रही होगी। कुछ कपड़े खरीदने के बाद मैंने उन्हें टेन्ट में ही बुला लिया था। सरफराज एटीएम स्वाइप मशीन के साथ हाजिर थे। फिर, सरफराज से लम्बी बातचीत हुई। छोटी सी बातचीत मैंने आग्रह करके रिकॉर्ड भी कर ली। सारी बातचीत का लब्बोलुआब यही है कि, हिन्दुस्तान को नकारने वालों ने ही हिन्दू-मुसलमान कर रखा है। हिन्दुस्तानी संस्कृति में वो ताकत है जो, दुनिया के किसी हिस्से के पास नहीं है। फिलहाल, सरफराज के विवाह के 7 साल बाद भी सन्तान नहीं है। जल्दी से उन्हें ये सुख प्राप्त हो और कारोबार फले-फूले। पत्नी भी इस बांधोज काम में बराबर की हिस्सेदार हैं, मालिकाना ही नहीं, काम के लिहाज से भी। यही वाला मॉडल हिन्दुस्तानी मॉडल है।


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