पैदाइश से प्रतापगढ़ी और व्यक्तित्व से इलाहाबादी। हर्षवर्धन त्रिपाठी देश के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं, जिनकी राजनीति और अर्थशास्त्र पर एक बराबर पकड़ है। हर्षवर्धन त्रिपाठी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में परास्नातक के साथ पत्रकारिता में भी परास्नातक की उपाधि हासिल की है। पत्रकारिता में आने की प्रेरणा देश के जाने माने पत्रकार रामबहादुर राय बने। करीब 2 दशक की पत्रकारिता में पत्रकारिता के तीनों ही माध्यमों- प्रिन्ट, टीवी और वेब- में काम किया है। पत्रकारिता की शुरुआत इलाहाबाद से ही स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर की। इलाहाबाद से निकलने वाले दोनों प्रमुख अखबारों- दैनिक जागरण और अमर उजाला- के लिए इलाहाबाद की शिक्षा और राजनीति पर नियमित लेखन किया। स्वंतत्र पत्रकार के तौर पर शुरुआत करने वाले हर्षवर्धन आज स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर टेलीविजन चैनलों की प्राइमटाइम बहस का नियमित चेहरा हैं। प्रयाग महाकुम्भ 2000-2001 में तत्कालीन ब्यूरो चीफ प्रताप सोमवन्शी के साथ दुनिया के पहले हिन्दी समाचार पोर्टल वेबदुनिया से जुड़ने का अवसर मिला। प्रयाग महाकुम्भ हिन्दू धर्म के मानने वालों के जीवन का अहम पड़ाव है। पत्रकारिता के शुरुआती दौर में ही दुनिया के सबसे बड़े मेले की रिपोर्टिंग के मौके ने एक रिपोर्टर के तौर पर मजबूत बुनियाद तैयार कर दी। वेबदुनिया के बाद दैनिक जागरण, कानपुर में काम करते हुए बेहद सौम्य स्वभाव के सम्पादक राजीव सचान के साथ प्रिन्ट की बारीकियां सीखने के साथ फिर से वेब में काम करने का मौका मिला। जागरण डॉट कॉम उस समय शुरुआती दौर में था। डेस्क पर काम करते हुए ऊबन होने लगी, तो एक दिन नौकरी से इस्तीफा दिया और दिल्ली पहुंचे। दिल्ली में खास मौका नहीं मिला। उस समय तक प्रताप सोमवन्शी सम्पादक के तौर पर अमर उजाला देहरादून पहुंच गए थे। रिपोर्टिंग का मौका था, इसलिए देहरादून पहुंच गए। देहरादून में 2 साल से भी कम समय काम किया लेकिन, अमर उजाला के साथ 2 साल की रिपोर्टिंग पत्रकारीय जीवन के रोमान्चकारी अवसरों में से एक रही। हर बीट की रिपोर्टिंग के साथ खासकर इन्डियन मिलिट्री एकेडमी, क्राइम और देहरादून के स्कूलों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दून स्कूल के तत्कालीन हेडमास्टर कान्ति बाजपेयी का साक्षात्कार अखबार की लीड खबर बना। इसके अलावा 1 महीने की चारधाम यात्रा ऋषिकेश ब्यूरो चीफ के तौर पर कवर करने का अवसर मिला।
2004 तक देश में टेलीविजन में नए-नए मौके दिख रहे थे। प्रिन्ट से टेलीविजन की तरफ जाने की इच्छा ने जोर मारा और अमर उजाला से भी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली आ तो गए। लेकिन, किसी न्यूज चैनल में नौकरी नहीं मिली। उसी समय स्टार न्यूज से निकलकर टीवी शुरुआती सम्पादक रहे संजय पुगलिया कुछ नया लेकर आ रहे थे। लेकिन, मुश्किल ये थी कि चैनल मुम्बई से आना था। इच्छा दिल्ली में ही टिकने की थी। लेकिन, नियति ने धक्का मारकर मुम्बई पहुंचा दिया। संजय पुगलिया सीएनबीसी टीवी 18 के हिन्दी चैनल की टीम बना रहे थे। उसी टीम का हिस्सा बनकर दिसम्बर 2004 में मुम्बई पहुंच गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीकॉम करने के बाद अर्थशास्त्र में परास्नातक की उपाधि हासिल करने का फायदा देश के नम्बर एक बिजनेस चैनल में काम करने के दौरान खूब मिला। 2004-08 मुम्बई में रहने के दौरान हर्षवर्धन त्रिपाठी सीएनबीसी आवाज की टीम का अहम हिस्सा बन गए। असिस्टेंट प्रोड्यूसर से सीनियर प्रोड्यूसर की यात्रा उसी दौरान तय हो गई। 2007 में चैनल में नॉन मार्केट बैन्ड के प्रमुख बना दिए गए। 2007 में हर्षवर्धन त्रिपाठी का विवाह डॉक्टर कन्चन से हुआ। मुम्बई में सबकुछ बहुत अच्छा था। लेकिन, वहां जीवनस्तर बेहतर करने की दुरुहता और दिल्ली के मोह ने फिर से जोर मारा। आखिरकार, काफी मशक्कत के बाद दिसम्बर 2008 में संजय पुगलिया ने डेस्क का जिम्मा देकर दिल्ली भेज दिया। 2009 के आखिर में सीएनबीसी टीवी 18 में छंटनी हुई। विकल्प था कि मुम्बई वापस लौटें या फिर नया ठिकाना तलाशा जाए। इस बार दिल्ली न छोड़ने का तय किया। और, जुलाई 2010 में बिजनेस एडिटर के तौर पर एक नए चैनल पी 7 के साथ जुड़ गए। नवम्बर 2014 में पी 7 न्यूज चैनल के आर्थिक मुश्किलों की वजह से बन्द होने के बाद स्वतंत्र पत्रकारिता करने का फैसला किया।
फिलहाल सीएनबीसी आवाज, लोकसभा टीवी के साथ पैनलिस्ट के तौर पर जुड़े हुए हैं। इसके अलावा Quint Hindi, First Post Hindi के साथ नियमित लेखक के तौर पर जुड़े हुए हैं। 2006 से दैनिक जागरण के सम्पादकीय पृष्ठ पर नियमित स्तम्भकार के तौर पर हर्षवर्धन त्रिपाठी की पहचान है। मुम्बई में रहने के दौरान ही टीवी में डेस्क की नौकरी करते अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए 2006 में ब्लॉगिंग शुरू की। 2007 में अपना ब्लॉग बतंगड़ बनाया। अब उसी ब्लॉग को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए ये वेबसाइट बनाई है।
न्यू मीडिया पर हर्षवर्धन त्रिपाठी की बात का खास महत्व है। 2006 से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग में मेहमान व्याख्याता के तौर पर नियमित जाना रहा। इसके अलावा देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों, विद्यालयों में करीब 100 राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल होने का अवसर मिला। 2007 में कौन बनाएगा मीडिया का कोड ऑफ कन्डक्ट विषय पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज में दिए गए व्याख्यान को विश्वविद्यालय की पत्रिका बरगद में जगह दी गई। राजनीतिक, आर्थिक विषयों के अलावा न्यू मीडिया पर बात करने के लिए देश भर के विश्वविद्यालयों, विद्यालयों, संस्थाओं से हर्षवर्धन त्रिपाठी को नियमित बुलावा आता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति की नब्ज समझने के लिए हर्षवर्धन त्रिपाठी की गिनती बेहतर पत्रकारों में होती है। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक बदलाव को लेकर 2007 से हर्षवर्धन त्रिपाठी के पूर्वानुमान लगभग सटीक बैठते रहे हैं। उत्तर प्रदेश 2007, 2012 और 2017 का विधानसभा रिपोर्टर और फिर विश्लेषक के तौर पर कवर किया। हर्षवर्धन त्रिपाठी ने 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव की रिपोर्टिंग की है। 2007 गुजरात विधानसभा चुनाव की रिपोर्टिंग करते तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को समझने की कोशिश की। 2015 में बिहार विधानसभा के रोचक मुकाबले की कवरेज की। 2004 में सीएनबीसी आवाज से जुड़ने के बाद से अब तक लगातार प्रोड्यूसर, रिपोर्टर और एंकर के तौर पर भारतीय बजट को लगातार समझने का मौका मिला।
स्वतंत्र पत्रकारिता करते हुए डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी शोध संस्थान में सीनियर फेलो

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