गुरमीत सिंह दोषी करार दे दिया गया। पूरी उम्मीद है कि ऊपर की अदालतें भी इस सजा को घटाने के बारे में कतई नहीं सोचेंगी। लेकिन, गुरमीत सिंह के मामले ने राजनीति और समाज के सामने कई बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन सवालों का जवाब नहीं खोजा गया, तो फिर से ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

बतंगड़ ब्लॉग

मृणाल पांडे की जमकर आलोचना क्यों जरूरी ?

जानी मानी लेखिका, हिन्दुस्तान अखबार की पूर्व प्रधान सम्पादक और प्रसार भारती की पूर्व चेयरमैन मृणाल पांडे ने ट्विटर पर ऐसा लिख दिया है जिसे, मृणाल पांडे के समर्थन में उतरे लोग आलोचना कह रहे Read more…

वीडियो

बच्चों का स्वामी विवेकानन्द से परिचय का समय

स्वामी विवेकानन्द पर शायद ही कोई विवाद कर सके, बावजूद इसके स्वामी जी के जीवन चरित्र के बारे में हिन्दुस्तान के बच्चों-बड़ों का खास ज्ञान नहीं है। सिवाय इसके कि उन्होंने शिकागो भाषण दिया था Read more…

राजनीति

बुद्धिजीवी कौन है?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के बुद्धिजीवियों को भाजपा विरोधी बताने के बाद ये सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या बुद्धिजीवी एक खास विचार के ही हैं। मेरी नजर में बुद्धिजीवी की बड़ी सीधी Read more…