जानी मानी लेखिका, हिन्दुस्तान अखबार की पूर्व प्रधान सम्पादक और प्रसार भारती की पूर्व चेयरमैन मृणाल पांडे ने ट्विटर पर ऐसा लिख दिया है जिसे, मृणाल पांडे के समर्थन में उतरे लोग आलोचना कह रहे हैं। लेकिन, दरअसल उनका लिखा हमारे समाज के बुद्धिजीवियों की गिरावट का बड़ा संकेत है। मृणाल जी को मैं बेहद शालीन पत्रकार, लेखिका के तौर पर देखता था। लेकिन, वैशाखनंदन के जिक्र के बाद उनके प्रति मेरी ही नहीं बहुतों की धारणा बदल गई है। दुर्भाग्य यह है कि अभी भी वे गलती का अहसास करने के बजाय इसे सही ठहराने में जुटी हैं। लोगों को सही हिन्दी सिखा रही हैं और पढ़ने-लिखने की सलाह दे रही हैं। उन्हीं पढ़ने-लिखने वाले लोगों का भरोसा बना रहे, इसके लिए मृणाल पांडे की जमकर आलोचना जरूरी है। खासकर बड़े लेखकों, पत्रकारों की तरफ से।


1 Comment

ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह 'रवि' · September 18, 2017 at 11:57 am

सहमत हूं

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