जिसको बेईमान मौसम कहते हैं ना, वही सुबह से नोएडा में था। अच्छी बात ये कि जाते-जाते ईमानदारी दिखा गया। बादलों के पीछे लगातार जोर मार रही बारिश की बूँदें टपक गईं। ईमानदार मौसम की तस्वीर देखिए। सब एकदम साफ, ख़ूबसूरत। ईमानदारी ऐसे ही साफ, ख़ूबसूरत, मन प्रसन्न करने वाली होती है। पता नहीं किसने पहली बार मौसम को बेईमान कहा होगा। मुझे लगता है कि शायद आशिकों की नजर की बेईमानी को लिखने वाले ने मौसम की बेईमानी क़रार दे दिया होगा। लेकिन, घिरे-घिरे से बादलों में भरा-पूरा पानी बिना गिरे लौट जाए, तो मेरी नजर में तो ये हुई मौसम की बेईमानी। ऐसे ही होती है, हमारी भी बेईमानी। बेईमानी को बड़ा जोर लगाकर करना होता है। ईमानदारी स्वाभाविक है।

Related Posts

अखबार में

कांग्रेस को नया नेता खोजने पर जोर देना चाहिए

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ निजी तौर पर मेरी बड़ी सहानुभूति है। और इस सहानुभूति की सबसे बड़ी वजह यह है कि निजी तौर पर राहुल गांधी मुझे भले आदमी नजर आते हैं। लेकिन, Read more…

बतंगड़ ब्लॉग

मृणाल पांडे की जमकर आलोचना क्यों जरूरी ?

जानी मानी लेखिका, हिन्दुस्तान अखबार की पूर्व प्रधान सम्पादक और प्रसार भारती की पूर्व चेयरमैन मृणाल पांडे ने ट्विटर पर ऐसा लिख दिया है जिसे, मृणाल पांडे के समर्थन में उतरे लोग आलोचना कह रहे Read more…

बतंगड़ ब्लॉग

अच्छी हिन्दी न आने का अपराधबोध !

बच्चा अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ता है या नहीं? अब यह सवाल नहीं रहा, एक सामान्य जानकारी भर रह गई है। हां, जिसका बच्चा अभी भी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में नहीं पढ़ रहा है, ऐसे Read more…