जिसको बेईमान मौसम कहते हैं ना, वही सुबह से नोएडा में था। अच्छी बात ये कि जाते-जाते ईमानदारी दिखा गया। बादलों के पीछे लगातार जोर मार रही बारिश की बूँदें टपक गईं। ईमानदार मौसम की तस्वीर देखिए। सब एकदम साफ, ख़ूबसूरत। ईमानदारी ऐसे ही साफ, ख़ूबसूरत, मन प्रसन्न करने वाली होती है। पता नहीं किसने पहली बार मौसम को बेईमान कहा होगा। मुझे लगता है कि शायद आशिकों की नजर की बेईमानी को लिखने वाले ने मौसम की बेईमानी क़रार दे दिया होगा। लेकिन, घिरे-घिरे से बादलों में भरा-पूरा पानी बिना गिरे लौट जाए, तो मेरी नजर में तो ये हुई मौसम की बेईमानी। ऐसे ही होती है, हमारी भी बेईमानी। बेईमानी को बड़ा जोर लगाकर करना होता है। ईमानदारी स्वाभाविक है।