सर्वोच्च न्यायालय के पटाखे पर दीपावली के लिए लगाए प्रतिबंध वाले फैसले के बाद मेरी पहली टिप्पणी यही थी। “कक्षा 8 में हम रहे होंगे, जब अनार हाथ में फट जाने से हम बुरी तरह से जल गए थे। उसके बाद से कम ही पटाखे छुड़ाते हैं और बहुत तेज आवाज वाले पटाखे हमें सुहाते भी कम हैं। लेकिन, बढ़िया रोशनी और फुलझड़ी, चकरी और अनार के साथ दीपावली मनाते ही हैं और अब तो दोनों बेटियों के फुलझड़ियों के साथ मगन होने का समय है। अब दिल्ली-NCR में पटाखा नहीं मिलेगा, तो इलाहाबाद से मंगाना पड़ेगा। रोशनी वाली धमाकेदार, दीपावली शुभ हो” लेकिन, हम खुद लम्बे समय से पटाखे से दूर हैं और इस बार भी रहेंगे। लेकिन, जिस तरह से कुछ बदमाश बुद्धिजीवी हर बात पर हिन्दू मुसलमान तुलना करते हैं, समाज के लिए वह खतरनाक है।


1 Comment

आशीष वाजपेयी · October 13, 2017 at 8:00 pm

संतुलित टिप्पणी। सागरिका और थरूर के जमाने बहुत शीघ्र जाने वाले हैं।

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